
लंदन। स्पीकर खेन्पो सोनम तेनफेल के नेतृत्व में निर्वासित तिब्बती संसद (टीपीआईई) के एक प्रतिनिधिमंडल ने १८ नवंबर २०२४ को यूनाइटेड किंगडम के संसद भवन के दौरे के साथ ब्रिटेन की अपनी आधिकारिक यात्रा शुरू की।
अपने कार्यक्रम के तहत प्रतिनिधिमंडल ने हाउस ऑफ कॉमंस की लोक लेखा समिति (पीएसी) के अध्यक्ष कंजर्वेटिव पार्टी के सांसद सर जेफ्री क्लिफ्टन ब्राउन से मुलाकात की। यह बैठक संस्थागत संरचनाओं, प्रक्रियात्मक रूपरेखाओं और पीएसी और टीपीआईई दोनों की कार्यप्रणाली की जानकारी को गहराई से आदान-प्रदान में एक मंच के रूप में उपयोगी साबित हुई। प्रतिनिधिमंडल को चल रहे पीएसी सत्र का अवलोकन करने का अनूठा अवसर भी मिला, जिससे उन्हें ब्रिटेन की संसद के भीतर संसद संचालन और निर्णय लेने की प्रक्रियाओं के बारे में मूल्यवान जानकारी मिली।
बाद में प्रतिनिधिमंडल ने अन्य प्रमुख गणमान्य व्यक्तियों के साथ सार्थक बातचीत की। ये चर्चाएं हाउस ऑफ़ लॉर्ड्स की भूमिका और जिम्मेदारी, इसकी संस्थागत संरचना और विधायी कार्य प्रणाली के बारे में अपनी समझ को व्यापक बनाने पर केंद्रित थीं। उन्होंने हाउस ऑफ़ लॉर्ड्स के भीतर संसद सदस्यों के कर्तव्यों और दायित्वों के बारे में भी जानकारी हासिल की और ब्रिटिश और निर्वासित तिब्बती संसद के बीच विधायी प्रथाओं और शासन मॉडल पर गहनता से तुलनात्मक चर्चा की।
इसके अतिरिक्त, प्रतिनिधिमंडल ने तिब्बत के अंदर मानवाधिकारों के उल्लंघन के ज्वलंत मुद्दे को उठाने के लिए इस महत्वपूर्ण मंच का उपयोग किया। उन्होंने चीनी कब्जे के तहत तिब्बतियों के सामने आने वाली चुनौतियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इसमें सांस्कृतिक, धार्मिक और भाषाई स्वतंत्रता का दमन को रोकने के साथ ही अंतरराष्ट्रीय ध्यान और समर्थन दिए जाने की सख्त आवश्यकता है। इस दौरे से महत्वपूर्ण मानवाधिकार परिप्रेक्ष्य को चर्चा में लाने में मदद मिली, जिसने इस मुद्दे से निपटने के लिए वैश्विक संस्थानों की साझा जिम्मेदारी पर जोर दिया।
यह दौरा संस्थागत विकास को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसमें निर्वासित तिब्बती संसद की प्रभावशीलता, पारदर्शिता और समावेशिता को बढ़ाने की क्षमता थी, साथ ही तिब्बत के लिए इसके वैश्विक पक्षधरता अभियान के प्रयासों को मजबूत किया जा सकता है।
यह आधिकारिक यात्रा यूएसएआईडी द्वारा कार्यान्वित की गई है और प्रतिनिधिमंडल के साथ एनडीआई और यूएसएआईडी के कर्मचारियों के साथ-साथ निर्वासित तिब्बती संसद के संसदीय सचिवालय के एक कार्यक्रम अधिकारी भी इस यात्रा में शामिल रहे।



