
गंगटोक। सिक्योंग पेन्पा शेरिंग ने १० नवंबर २०२४ को भारत के पूर्वोत्तर में तिब्बती बस्तियों की अपनी आधिकारिक यात्रा के दूसरे चरण के अंतिम दिन सिक्किम की राजधानी गंगटोक में तिब्बती समुदाय को संबोधित किया।
पूर्वोत्तर के मुख्य प्रतिनिधि अधिकारी दोरजे रिग्जिन, गंगटोक तिब्बती सेटलमेंट अधिकारी धोंडुप सांग्पो, कलिम्पोंग तिब्बती सेटलमेंट अधिकारी शेटेन, गंगटोक स्थित सेरा जे ड्रोफेनलिंग मठ के महंत, स्थानीय तिब्बती सभा के अध्यक्ष जिन्पा, तिब्बती मुक्ति साधना के क्षेत्रीय अध्यक्ष सांगेय, तिब्बती युवा कांग्रेस के क्षेत्रीय अध्यक्ष लोबसांग वांग्याल और तिब्बती महिला संघ की क्षेत्रीय अध्यक्ष रिग्जिन डोल्मा के साथ-साथ स्थानीय तिब्बती सीएसओ के अन्य प्रतिनिधि गण इस सभा में उपस्थित थे।
कार्यक्रम की शुरुआत गंगटोक तिब्बती सेटलमेंट अधिकारी के स्वागत भाषण से हुई। इसके बाद सिक्योंग पेन्पा शेरिंग ने निर्वासित तिब्बतियों के सामने मौजूदा राजनीतिक और सामाजिक माहौल पर टिप्पणी की। सिक्योंग ने सोशल मीडिया पर चीनी व्यापक प्रचार के बढ़ते प्रभाव पर प्रकाश डाला, जिसका उद्देश्य निर्वासित तिब्बती समुदाय के भीतर विभाजन पैदा करना है। विशेष रूप से परम पावन दलाई लामा और अन्य प्रमुख तिब्बती नेताओं को निशाना बनाना है। इसलिए, सिक्योंग ने जनता से आग्रह किया कि वे अपने सामने आने वाली सूचनाओं का गंभीरता से मूल्यांकन करें।
इसके अलावा, सिक्योंग ने दोहराया कि १६वें काशाग का काम परम पावन दलाई लामा के विशेष रूप से राजनीतिक, सामाजिक कल्याण और प्रशासनिक नीतियों के क्षेत्रों में दृष्टिकोण से निर्देशित है। उन्होंने कहा कि इस कार्यकाल के दौरान प्राप्त की गई हर उपलब्धि परम पावन की दया और आशीर्वाद के कारण है।
केंद्रीय तिब्बती प्रशासन के गठन के बारे में बताते हुए सिक्योंग ने सभी तिब्बती क्षेत्रों और धार्मिक परंपराओं की इसमें समावेशिता पर जोर दिया तथा तिब्बत के साझा हित के लिए एकता का आग्रह किया। उन्होंने १६वें काशाग के नेतृत्व में शुरू की गई कई पहलों को भी रेखांकित किया, जिनमें डिजिटल संग्रह परियोजना, तिब्बती भाषा के संरक्षण में तीव्र प्रयास, आवास कार्यक्रम और संवर्धित सांख्यिकीय आंकड़ों के माध्यम से सार्वजनिक सेवाओं को बेहतर बनाने के प्रयास शामिल हैं।
समापन से पहले सिक्योंग ने निर्वासन में तिब्बतियों के सामने आने वाली चुनौतियों को संबोधित किया, जैसे कि बेहतर रोजगार के अवसरों की तलाश में बड़ी संख्या में युवा तिब्बती भारत और नेपाल से विदेश जा रहे हैं। इससे तिब्बती बस्तियों में रहने वाली आबादी में गिरावट आ रही है। उन्होंने कहा कि इस डोमिनोज़ प्रभाव का तिब्बती बस्तियों और स्कूलों की स्थिरता पर कई नकारात्मक प्रभाव पड़ते हैं।
अगले दिन सिक्योंग पेन्पा शेरिंग ने सिक्किम के माननीय मुख्यमंत्री श्री प्रेम सिंह तमांग गोले के साथ सिक्किम में मिंड्रोलिंग ज़ंगडोकपालरी मंदिर के उद्घाटन समारोह में भाग लिया। इसमें केंद्रीय तिब्बती प्रशासन की ओर से स्पीकर खेन्पो सोनम तेनफेल और सुरक्षा मंत्री डोल्मा ग्यारी भी शामिल हुईं। इस कार्यक्रम के दौरान सिक्योंग ने तिब्बती भाषा में समारोह के लिए लिखे गए कशाग का बयान पढ़कर सुनाया।