वाशिंगटन डीसी। निर्वासित तिब्बत सरकार के सिक्योंग पेन्पा शेरिंग के अमेरिका दौरे के पांचवें दिन १० दिसंबर २०२४ को कई महत्वपूर्ण कार्यक्रम पहले से निर्धारित थे। दिन की शुरुआत सिक्योंग द्वारा ‘अमेरिकी नीति और रणनीति में तिब्बत के भविष्य पर एक वार्तालाप’ विषयक चर्चा में भाग लेने के साथ हुई। इस कार्यक्रम में स्पीकर एमेरिटा नैन्सी पेलोसी और रिचर्ड गेरे ने भी अपने बहुमूल्य विचार व्यक्त किए। चर्चा में तिब्बती मुद्दों के लिए अमेरिकी विशेष समन्वयक और अमेरिका में अंडर सेक्रेटरी उजरा ज़ेया भी उपस्थित थीं। उन्होंने द्विपक्षीय और बहुपक्षीय समन्वय के माध्यम से तिब्बतियों का समर्थन करने के प्रशासन के प्रयासों पर प्रकाश डाला। उन्होंने निरंतर कार्रवाई की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा, ‘हम जानते हैं कि सार्थक स्वायत्तता के लिए बातचीत के ज़रिए समझौता होने तक और काम किया जाना बाकी है। जब तक कि हर जगह तिब्बती अपने मानवाधिकारों और मौलिक स्वतंत्रता तक पहुँच नहीं बना लेते और तिब्बती अपनी इच्छानुसार अपने धर्म का पालन करने के लिए स्वतंत्र नहीं महसूस करते और अपनी भाषा नहीं बोल सकते, तब तक और काम किया जाना बाकी रहेगा।’
थिंक टैंकों के महत्व पर जोर देते हुए, सिक्योंग ने विल्सन सेंटर में एक बैठक में भाग लिया। यह वाशिंगटन, डीसी स्थित कांग्रेस द्वारा अपने काम के लिए नामित थिंक टैंक है और नीति निर्माताओं को वैश्विक मामलों पर निष्पक्ष सलाह प्रदान करने के लिए जाना जाता है।
तिब्बती मुद्दों के लिए अमेरिकी विशेष समन्वयक ने आगे परम पावन दलाई लामा के हवाले से एक खुशहाल और शांतिपूर्ण भविष्य की दृष्टि विकसित करने और इसे साकार करने के प्रयास करने के महत्व पर बल दिया।
इसके बाद, सिक्योंग पेन्पा शेरिंग ने उपस्थित श्रोताओं के प्रति आभार व्यक्त किया। स्पीकर एमेरिटा नैन्सी पेलोसी और रिचर्ड गेरे को धन्यवाद दिया। सिक्योंग ने इन दोनों का परिचय ‘तिब्बतियों के समर्थन के दो महान स्तंभ’ के रूप में दिया। उन्होंने अवर सचिव उजरा ज़ेया को तिब्बत के प्रति उनके दृढ़ समर्थन और सहायता के लिए अपना हार्दिक आभार भी व्यक्त किया।
इस बैठक में सिक्योंग ने विल्सन सेंटर के अध्यक्ष मार्क ए. ग्रीन और पूर्व यूएसएआईडी प्रशासक के साथ-साथ कई उल्लेखनीय उपस्थित लोगों के साथ बातचीत की। इनमें महामहिम इवान ड्यूक मार्केज़ (विल्सन सेंटर फेलो और कोलंबिया के पूर्व राष्ट्रपति), प्रतिनिधि इलियाना रोस-लेहटिनन (विल्सन सेंटर जीएसी और कांग्रेस की पूर्व सांसद), एडी एसेवेडो (विल्सन सेंटर के चीफ ऑफ स्टाफ और वरिष्ठ नीति सलाहकार), जूली वाडलर (विल्सन सेंटर विकास निदेशक), डॉ रॉबर्ट डेली (चीन और अमेरिका पर विल्सन सेंटर के किसिंजर संस्थान के निदेशक), जॉन थॉन माजोक (शरणार्थी और जबरन विस्थापन पहल के निदेशक), शिहोको गोटो (विल्सन सेंटर में हिन्द- प्रशांत प्रोग्राम के निदेशक) और लुकास मायर्स (हिन्द- प्रशांत प्रोग्राम के वरिष्ठ सहयोगी) शामिल थे।
इसके बाद, सिक्योंग ने तिब्बत के लिए अंतरराष्ट्रीय अभियान (आईसीटी) बोर्ड की बैठक में भाग लिया, जहां उनसे पुनर्जन्म के मुद्दे के बारे में पूछा गया। इस बारे में अपनी तर्कपूर्ण नीति को दोहराते हुए उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि उन्होंने ऐसे आयोजनों के लिए काशाग की तैयारियों का भी खाका पेश किया, जिसमें किसी भी अप्रत्याशित परिस्थिति से निपटने के लिए एक व्यापक निर्देशिका का मसौदा तैयार करना भी शामिल है।
दिन के अंत में सिक्योंग ने रिचर्ड गेरे, प्रतिनिधि नामग्याल चोएडुप, आईसीटी के भुचुंग के. शेरिंग और आईसीटी सरकारी संबंधों की देखरेख करने वाले फ्रांज मैटनर के साथ मिलकर सीनेटर जेफ मर्कले से शिष्टाचार भेंट की, जो रिज़ॉल्व तिब्बत ऐक्ट के मूल प्रायोजक हैं और इसकी प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।