धर्मशाला। भारत में तिब्बती स्कूलों में शीतकालीन अवकाश के लिए अपने शैक्षणिक सत्र का समापन किया। इसके ठीक बाद सीटीए के शिक्षा विभाग ने आज २३ दिसंबर की सुबह धर्मशाला में सीटीए के प्रशासनिक प्रशिक्षण केंद्र में स्कूल प्रीफेक्ट्स और कैप्टन के लिए नेतृत्व कार्यशाला शुरू की। इसका उद्धाटन एक संक्षिप्त समारोह के साथ किया गया।
उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि शिक्षा मंत्री थारलाम डोल्मा चांगरा थे। उन्होंने तिब्बती छात्रों को शिक्षित करने और तिब्बती स्कूलों के प्रशासन के अनुभवों के बारे में गहन जानकारी दी।
कार्यशाला में नेपाल स्थित दो तिब्बती स्कूलों सहित १६ विभिन्न तिब्बती स्कूलों के कुल ४३ छात्र प्रतिनिधिगण भाग ले रहे हैं। इसके अलावा इन स्कूलों के १६ शिक्षक इस छह दिवसीय कार्यशाला में छात्रों के साथ परामर्शदाता और अभिभावक के रूप में मौजूद रहेंगे।
कार्यक्रम की शुरुआत शिक्षा विभाग के शैक्षणिक अनुभाग में अतिरिक्त सचिव तेनजिन दोरजी के परिचयात्मक भाषण से हुई। उन्होंने नेतृत्व कार्यशाला की एक रूपरेखा प्रस्तुत की। इसमें इस बात पर बल दिया गया कि इसका उद्देश्य प्रतिभागियों के नेतृत्व कौशल को बढ़ाना है। साथ ही निर्वासित तिब्बतियों के लिए बुनियादी शिक्षा नीति के उद्देश्यों के अनुरूप अन्य आवश्यक योग्यताएं प्रदान करना है। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि कार्यशाला का उद्देश्य छात्र नेताओं में करुणा और सार्वभौमिक जिम्मेदारी जैसे मानवीय गुणों को विकसित करना भी है। साथ ही तिब्बती सांस्कृतिक और भाषाई विरासत को संरक्षित करने के महत्व को रेखांकित करना है, जिसे तिब्बत के अंदर सरकारी स्कूलों में व्यवस्थित रूप से कमज़ोर किया जाता है।
अपने मुख्य भाषण में कलोन थरलाम डोल्मा चांगरा ने एक मजबूत तिब्बती निर्वासित समुदाय की स्थापना में परम पावन दलाई लामा के नेतृत्व में पुरानी पीढ़ियों द्वारा किए गए अपार बलिदानों और योगदानों को याद किया। उन्होंने कहा, ‘हमारे तिब्बती स्कूलों द्वारा प्रदान किए जाने वाले प्रचुर अवसरों और संसाधनों के लिए हमेशा आभारी रहें, जो अक्सर प्रतिष्ठित स्थानीय और निजी स्कूलों में भी उपलब्ध नहीं होते हैं। आपको इन अवसरों के साथ आने वाली तिब्बती जिम्मेदारियों को निभाना चाहिए।’ कलोन ने प्रतिभागियों को इस कार्यशाला में जो कुछ भी सीखा है उसे अपने साथी छात्रों के बीच बांटने के लिए प्रोत्साहित किया।
कलोन थरलम डोलमा चांगरा ने अपने पूर्व स्कूल प्रिंसिपल के रूप में अपने अनुभवों के आधार पर विशेष रूप से स्कूल प्रीफेक्ट्स और कैप्टन की जिम्मेदारियों के बारे में बात की। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि प्रीफेक्ट्स और कैप्टन को शिक्षकों और छात्रों के बीच एक पुल के रूप में कार्य करना चाहिए, जिससे छात्रों के बीच अपर्याप्तता और उपचार में असमानता जैसे मुद्दों को हल करने में मदद मिल सके। उन्होंने स्कूल के माहौल में शरारतपन को भी अस्वीकार कर दिया और सभी को स्कूल के अनुशासन का पालन करने और आत्म-अनुशासन बनाए रखने की सलाह दी। इसके अतिरिक्त, कलोन ने शैक्षणिक सफलता के लिए अच्छे स्वास्थ्य के महत्व पर जोर दिया।
इन बिंदुओं के अलावा शिक्षा कलोन ने तिब्बती स्कूलों में विशेष जरूरतों वाले बच्चों की बढ़ती संख्या पर चिंता व्यक्त की और स्कूल प्रशासन और छात्रों से उन्हें सहायता देने के लिए विशेष सेवाएं देने का आग्रह किया।
समारोह का समापन विभाग के शैक्षणिक अनुभाग से अवर सचिव दोरजी वांगड्यू के धन्यवाद प्रस्ताव के साथ हुआ।
इस नेतृत्व कार्यशाला के दौरान सलाहकार और सुविधाकर्ता विभिन्न विषयों पर चर्चा करेंगे। इसमें तिब्बती भाषा और संस्कृति का महत्व, निर्वासन में तिब्बती लोकतंत्र का विकास, एसईई लर्निंग, नेतृत्व और शिक्षा, संघर्ष समाधान, नेताओं के लिए संचार कौशल, शिक्षा विभाग का छात्रवृत्ति कार्यक्रम, साइबर सुरक्षा और संरक्षा, स्कूलों में लैंगिक समानता और कैरियर मैपिंग शामिल हैं। कार्यक्रम में दलाई लामा लाइब्रेरी और अभिलेखागार और विभिन्न सीटीए विभागों के शैक्षिक दौरे भी शामिल होंगे।