ब्रुसेल्स। चीन में यूरोपीय संघ (ईयू) प्रतिनिधिमंडल ने अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस के अवसर पर १० दिसंबर, २०२४ को एक बयान जारी किया, जिसमें वैश्विक स्तर पर मानवाधिकारों की सुरक्षा के लिए यूरोपीय संघ की प्रतिबद्धता को दोहराया गया था। बयान में चीन में मानवाधिकारों के हनन, विशेष रूप से तिब्बत के संदर्भ में हनन को लेकर उत्पन्न चिंताओं पर प्रकाश डाला गया। साथ ही तिब्बत में नागरिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक स्वतंत्रता के क्षरण के बारे में यूरोपीय संघ की गंभीर चिंताओं को व्यक्त किया गया।
यूरोपीय संघ ने तिब्बती क्षेत्रों में भाषण, अभिव्यक्ति, आंदोलन और सभा की स्वतंत्रता पर लगाए गए गंभीर प्रतिबंधों पर प्रकाश डाला। क्योंकि वहां पर तिब्बतियों को असंतोष व्यक्त करने के उनके अधिकारों पर कड़ा नियंत्रण लगा है और ऐसा करने पर उन्हें कठोर दमन का सामना करना पड़ रहा है। बयान में तिब्बतियों को अंतरराष्ट्रीय यात्रा करने को लेकर लगाई गई पाबंदियों का भी उल्लेख किया गया है, जिसमें पासपोर्ट प्राप्त करने पर प्रतिबंध और लामाओं जैसे तिब्बती धार्मिक नेताओं की आवाजाही पर कड़े नियंत्रण शामिल हैं।
यूरोपीय संघ ने धार्मिक गतिविधियों की निगरानी और उन पर प्रतिबंध सहित धार्मिक स्वतंत्रता के दमन पर चिंता व्यक्त की है। तिब्बती बौद्ध धर्म सरकार के बढ़ते नियंत्रण में दबा हुआ है। धार्मिक रीति रिवाजों को चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) की विचारधारा के साथ जोड़ दिया गया है।
बयान में तिब्बती बच्चों के लिए अनिवार्य आवासीय स्कूलों की स्थापना को भी चिन्हित किया गया है, जहां बच्चों को उनके परिवारों से जबरन अलग कर दिया जाता है, जो तिब्बती सांस्कृतिक और भाषाई पहचान के संरक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण चिंता का विषय है।
यूरोपीय संघ के प्रतिनिधिमंडल ने तिब्बती भाषा और संस्कृति को दबाने के प्रयासों के बारे में चिंता जताई, जिसमें गोलोग में जिग्मे ग्यालत्सेन नेशनलिटीज वोकेशनल स्कूल जैसे तिब्बती भाषा में पढ़ाने वाले स्कूलों को बंद करने का हवाला दिया गया। इस तरह के स्कूलों के बंद होने से मंदारिन-भाषा शिक्षा को बढ़ावा मिलने के साथ ही तिब्बत के सांस्कृतिक विनाश का खतरा उत्पन्न हो गया है।
यूरोपीय संघ ने छह तिब्बती राजनीतिक कैदियों (चाद्रेल रिनपोछे, आन्या सांगद्रा, गो शेरब ग्यासो, गोलोग पाल्डेन, सेमकी डोल्मा और ताशी दोरजे) की तत्काल और बिना शर्त रिहाई का अपना पुराना आह्वान दोहराया। इन लोगों को उनके द्वारा अपने मौलिक अधिकारों का उपयोग करने के एवज में मनमाने ढंग से हिरासत में लिया गया था। इसने निष्पक्ष सुनवाई के महत्व, ‘निर्दिष्ट स्थान पर आवासीय निगरानी (आरएसडीएल)’ जैसी परंपराओं के उन्मूलन और यातना और दुर्व्यवहार को समाप्त करने पर जोर दिया। मनमाने ढंग से हिरासत में लिए जाने को लेकर यूरोपीय संघ की चिंताएं तिब्बती राजनीतिक कैदियों को लेकर भी काफी हैं। विशेष रूप से उन लोगों को लेकर, जिन्हें तिब्बती अधिकारों और स्वतंत्रता के लिए शांतिपूर्ण अभियान चलाने के खिलाफ गिरफ्तार किया गया है।
यूरोपीय संघ प्रतिनिधिमंडल ने तिब्बत के साथ अंतरराष्ट्रीय समुदाय के संलग्न होने की पुष्टि की और स्थिति की निगरानी करने और बातचीत को बढ़ावा देने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय और नागरिक समाज संगठनों से अधिक से अधिक यात्रा करने को प्रोत्साहित किया। प्रतिनिधिमंडल ने ३९वें यूरोपीय संघ-चीन मानवाधिकार वार्ता के हिस्से के रूप में जून २०२४ में तिब्बत की यात्रा की, जो इस क्षेत्र में मानवाधिकारों की चिंताओं को उठाने में यूरोपीय संघ की निरंतर रुचि को प्रदर्शित करती है।
अंत में अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस २०२४ पर यूरोपीय संघ के बयान में तिब्बत में मानवाधिकारों की स्थिति के बारे में उसकी निरंतर चिंता को रेखांकित किया गया है। प्रतिनिधिमंडल ने चीन से तिब्बतियों के अधिकारों का सम्मान करने और उनकी रक्षा करने का आह्वान किया और सांस्कृतिक संरक्षण, धार्मिक स्वतंत्रता और आत्म-अभिव्यक्ति के अधिकार के महत्व पर जोर दिया। यूरोपीय संघ ने चीन से अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार तंत्रों के साथ अधिक रचनात्मक रूप से जुड़ने और ऐसा माहौल बनाने का भी आग्रह किया, जहां तिब्बती स्वतंत्र रूप से अपने धर्म का पालन कर सकें और अपनी सांस्कृतिक पहचान बनाए रख सकें।