
नई दिल्ली। यूएसएड और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक संस्थान (एनडीआई) द्वारा प्रायोजित पांच दिवसीय वैधानिक अनुपालन प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन १३ जनवरी २०२५ को भारतीय लोक प्रशासन संस्थान (आईआईपीए), नई दिल्ली में हुआ। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य भारत और नेपाल स्थित महालेखा परीक्षक (ओएजी) मुख्यालयों में पदस्थापित ३३ प्रतिभागियों को अनुपालन और शासन स्तर की आवश्यक जानकारियां उपलब्ध करना है।
उद्घाटन सत्र में आईआईपीए के महानिदेशक और आईएएस (सेवानिवृत्त) श्री सुरेन्द्र नाथ त्रिपाठी और आईआईपीए के रजिस्ट्रार श्री अमिताभ रंजन शामिल हुए। कार्यक्रम समन्वयक डॉ. सुरभि पांडे ने प्रशिक्षण के उद्देश्यों से प्रतिभागियों को अवगत कराया।
श्री सुरेन्द्र नाथ त्रिपाठी ने अपने उद्घाटन भाषण में प्रबंधन में बदलावों के महत्व को रेखांकित किया और प्रतिभागियों को संगठनात्मक चुनौतियों का प्रभावी ढंग से समाधान करने के लिए व्यापक परिप्रेक्ष्य में स्थितियों का विश्लेषण करने की क्षमता विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया।
रजिस्ट्रार श्री अमिताभ रंजन ने तिब्बत के डिंगरी काउंटी में हाल ही में आए भूकंप पर संवेदना व्यक्त करते हुए इसके जानमाल पर पड़े विनाशकारी प्रभाव पर प्रकाश डाला। उन्होंने सीटीए के लिए विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (एफसीआरए) का पालन करने के महत्व पर बल दिया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि संगठन के सुचारू और प्रभावी संचालन को सुनिश्चित करने के लिए नियमों का अनुपालन महत्वपूर्ण है।
महालेखा परीक्षक कार्यालय की ओर से संयुक्त सचिव कुंचोक वांगडु ने सीटीए लेखा परीक्षकों के लिए इस तरह का प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने के लिए आईआईपीए के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने आईआईपीए की विशेषज्ञता और सीटीए की ऑडिटिंग टीम की क्षमता को मजबूत करने के उसके प्रयासों की सराहना की। यही टीम प्रशासन के भीतर जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में विषय विशेषज्ञों के नेतृत्व में एफसीआरए संशोधन अधिनियम २०२०, भावनात्मक बुद्धिमत्ता और माइंड मैट्रिक्स, आईटी अधिनियम और धर्मार्थ समितियों के लिए नियम और ऑडिट और प्रदर्शन ऑडिट जैसे विषयों पर सत्र आयोजित होंगे। कार्यक्रम का समापन १८ जनवरी २०२५ को होगा, जिसमें तनाव और समय प्रबंधन पर केंद्रित एक समापन सत्र होगा। इस प्रशिक्षण से सीटीए की अनुपालन क्षमताओं में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है, जिससे बेहतर प्रशासन और परिचालन दक्षता सुनिश्चित होगी।