नई दिल्ली, १६ दिसंबर २०२४। दिल्ली में तिब्बती संसदीय दल का पक्षधरता प्रयास: भारतीय संसद का शीतकालीन सत्र चल रहा है। इसी दौरान १७वीं निर्वासित तिब्बती संसद के सदस्यों ने नई दिल्ली में तिब्बत के पक्ष में पहल शुरू की है। उनका उद्देश्य चीनी कम्युनिस्ट शासन के तहत तिब्बती लोगों के सामने आने वाली गंभीर चुनौतियों के बारे में जागरूकता बढ़ाना, १९५९ से परम पावन दलाई लामा और तिब्बती शरणार्थियों की मेजबानी करने के लिए भारत सरकार और यहां के लोगों के प्रति आभार व्यक्त करना और भारतीय सांसदों को तिब्बत के लिए सर्वदलीय भारतीय संसदीय मंच (एपीआईपीएफटी) में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित करना है।
निर्वासित तिब्बती संसद के स्पीकर खेन्पो सोनम तेनफेल और डिप्टी स्पीकर डोल्मा शेरिंग तेखांग सहित २९ सांसदों के एक प्रतिनिधिमंडल ने इन पक्षधरता प्रयासों की शुरुआत की। प्रतिनिधिमंडल को छह समितियों में विभाजित किया गया। इन समितियों ने भारत के एक केंद्रीय मंत्री, १६ राज्यों के आठ अलग-अलग राजनीतिक दलों का प्रतिनिधित्व करने वाले राज्यसभा और लोकसभा के २० सदस्यों के साथ-साथ कई अन्य गणमान्य व्यक्तियों के साथ मिलकर बातचीत की।
उपरोक्त छह समितियों में रखे गए सांसदों का विवरण इस प्रकार है। पहली समिति में स्पीकर खेन्पो सोनम तेनफेल, सांसद गेशे मोनलम थारचिन, सांसद यूडन औकात्संग, सांसद ताशी धुंडुप और सांसद तेनजिंग जिग्मे शामिल थे।
दूसरी समिति में डिप्टी स्पीकर डोल्मा शेरिंग तेखांग, सांसद दावा फुनकी, सांसद कुंगा सोटोप, सांसद लोबसांग थुप्टेन और सांसद थुप्टेन ग्यात्सो थे। तीसरे समूह में सांसद दावा शेरिंग, सांसद तेन्पा यारफेल, सांसद रिग्जिन ल्हुंडुप, सांसद वांगडु दोरजी और सांसद पेमा सो शामिल थे।
चौथी समिति में सांसद तेनज़िन जिगदल, सांसद तेन्पा यारफेल, सांसद सानेसांग धोंदुप ताशी, सांसद शेरिंग यांगचेन और सांसद फुरपा दोरजी रखे गए थे। पांचवें समूह में सांसद लोपोन थुप्टेन ग्यालसेन, सांसद लघ्यारी नामग्याल डोलकर, सांसद गेशे अटोंग रिनचेन ग्यालसेन और सांसद चोएडक ग्यासो थे। छठे समूह में सांसद मिग्युर दोरजी, सांसद गेशे ल्हारम्पा गोवो लोबसांग फेंडे, सांसद शेरिंग ल्हामो, सांसद लोबसांग ग्यासो सिथेर और सांसद थोंडुप शेरिंग शामिल किए गए थे।
स्पीकर के नेतृत्व वाली पहली समिति ने ओडिशा से भाजपा के लोकसभा सदस्य डॉ. रवीन्द्र नारायण बेहरा, ओडिशा से भाजपा के लोकसभा सदस्य सांसद प्रदीप पुरोहित, ओडिशा से भाजपा के लोकसभा सदस्य सांसद सुकांत कुमार पाणिग्रही, ओडिशा से भाजपा के लोकसभा सदस्य सांसद विजय बघेल, पूर्व राज्य मंत्री श्री निसिथ प्रमाणिक, कांग्रेस की लोकसभा सदस्य ज्योत्सना चरणदास महंत और भाजपा के लोकसभा सांसद बृजमोहन अग्रवाल से मुलाकात की।
दूसरी समिति ने ओडिशा से भाजपा के लोकसभा सदस्य और तिब्बत के लिए अखिल भारतीय सर्वदलीय संसदीय मंच (एपीआईपीएफटी) के संयोजक भर्तृहरि महताब, त्रिपुरा से भाजपा की लोकसभा सदस्य कृति देवी देबबर्मन, राजस्थान से लोकसभा सदस्य राजकुमार राउत, बिहार से भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के लोकसभा सदस्य सुदामा प्रसाद, लोकसभा सदस्य (भाजपा) काली चरण सिंह, लोकसभा सदस्य (भाजपा) भोजराज नाग, लोकसभा सदस्य अल्फ्रेड कन्नगम आर्थर, लोकसभा सदस्य (कांग्रेस) सलेंग ए. संगमा, लोकसभा सदस्य (जोराम पीपुल्स मूवमेंट) रिचर्ड वनलालहमंगइहा, लोकसभा (राजद) सांसद सुधाकर सिंह, खादी और ग्रामोद्योग आयोग के पूर्व सदस्य श्री बसंत और लोकसभा सदस्य (समाजवादी पार्टी) जियाउर रहमान बर्क से मुलाकात की।
तीसरी समिति ने हिमाचल प्रदेश (भाजपा) से राज्यसभा सदस्य हर्ष महाजन और हिमाचल प्रदेश (भाजपा) से राज्यसभा सदस्य डॉ. राजीव भारद्वाज के साथ बैठक की।
चौथी समिति ने केरल से लोकसभा सदस्य (क्रांतिकारी समाजवादी पार्टी) सांसद एन.के. प्रेमचंद्रन के साथ बैठक की।
पांचवीं समिति ने गुजरात से लोकसभा सदस्य और पूर्व केंद्रीय मंत्री (भाजपा) सांसद पुरुषोत्तम रूपाला, गुजरात से लोकसभा सदस्य (भाजपा) मितेश रमेशभाई पटेल और मध्य प्रदेश से राज्यसभा सदस्य (कांग्रेस) दिग्विजय सिंह से मुलाकात की।
छठी समिति ने भारत के संसदीय मामलों के केंद्रीय मंत्री श्री किरेन रिजिजू और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) के महासचिव श्री दोराईसामी राजा के साथ बैठकें कीं।
उपरोक्त भारतीय नेताओं को सौंपे गए आठ सूत्री अपील पत्र में तिब्बती सांसदों ने अपील की कि तिब्बत को ऐतिहासिक साक्ष्यों के आधार पर एक विशिष्ट और संप्रभु अतीत वाले अधिग्रहीत राष्ट्र के रूप में मान्यता दी जानी चाहिए। पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना (पीआरसी) को तिब्बत-चीन संघर्ष को मध्यम मार्ग नीति के तहत हल करने के लिए दलाई लामा या निर्वाचित तिब्बती नेताओं के प्रतिनिधियों के साथ सार्थक बातचीत करनी चाहिए और चीन के संविधान के तहत वास्तविक स्वायत्तता की मांग करनी चाहिए।
उन्होंने यह भी अपील की कि जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन (यूएनएफसीसीसी) को तिब्बत के संसाधनों के चीन के दोहन के पर्यावरणीय प्रभाव और वैश्विक जलवायु परिवर्तन में इसके योगदान पर अध्ययन शुरू करना चाहिए। स्वतंत्र मानवाधिकार संगठनों को तिब्बत में मानवाधिकार स्थिति की निगरानी करने की अनुमति दी जानी चाहिए और संयुक्त राष्ट्र के विशेष प्रतिवेदकों को यात्रा के लिए आमंत्रित किया जाना चाहिए। चीन को ११वें पंचेन लामा गेधुन चोएक्यी न्यिमा सहित सभी तिब्बती राजनीतिक कैदियों को भी रिहा करना चाहिए। पीआरसी को तिब्बती संस्कृति, भाषा और धर्म को खत्म करने के उद्देश्य से चलाई जा रही अपनी नीतियों को वापस ले लेना चाहिए।
इसके अतिरिक्त, प्रतिनिधिमंडल ने आग्रह किया कि लोकतांत्रिक संस्थाओं और वैश्विक स्थिरता के लिए खतरा बने चीन के अधिनायकवाद और गलत सूचना अभियानों का मुकाबला करने के लिए एक राष्ट्रीय विधायी ढांचा स्थापित किया जाना चाहिए। भारत के नीति-निर्माताओं को सभी उपलब्ध प्लेटफार्मों पर तिब्बत में मानवाधिकारों के उल्लंघन के बारे में जागरुकता बढ़ानी चाहिए और इस बारे में चिंता व्यक्त करनी चाहिए।