
बाकू (अजरबैजान), १० नवंबर २०२४। आज १० नवंबर से बाकू में शुरू कॉप- २९ वैश्विक जलवायु शिखर सम्मेलन में तिब्बती प्रतिनिधियों- देचेन पाल्मो और धोंडुप वांगमो ने तिब्बत में पर्यावरण संबंधी चिंताओं पर बहुत जरूरी ध्यान आकृष्ट किया। क्षेत्र के हितों की ओर ध्यान दिलाते हुए उन्होंने डेरगे बांध परियोजना के संभावित पारिस्थितिकीय प्रभावों पर प्रकाश डाला। यह परियोजना एक जलविद्युत पहल है जो ड्रिचू नदी की धारा को बदलने और इसके पानी पर निर्भर निचले देशों के समुदायों को प्रभावित करने वाला है।
कॉप-२९ के पहले दिन तिब्बती पर्यावरण शोधकर्ता डेचेन पाल्मो और धोंडुप वांगमो ने डेरगे बांध परियोजना द्वारा उत्पन्न पर्यावरणीय और सांस्कृतिक चुनौतियों के बारे में जागरुकता बढ़ाने के लिए एक अभियान शुरू किया। उन्होंने उपस्थित लोगों, सरकारी प्रतिनिधियों और पर्यावरण संगठनों को ‘तिब्बत में डेरगे बांध परियोजना को न कहें: ड्रिचू नदी, समुदाय और विरासत को विनाश से बचाएं’ शीर्षक से एक विवरणिका (ब्रोशर) वितरित किया।
ब्रोशर ड्रिचू नदी पर बांध के संभावित प्रभावों की रूपरेखा प्रस्तुत करता है, जो न केवल पारिस्थितिकीय महत्व का है, बल्कि तिब्बत में स्थानीय समुदायों के लिए सांस्कृतिक महत्व का भी है। देचेन ने बताया, ‘हमारा लक्ष्य ड्रिचू नदी के संरक्षण के लिए समर्थन जुटाना और तिब्बत की प्राकृतिक और सांस्कृतिक विरासत को होने वाले अपूरणीय नुकसान को रोकना है’।
कॉप-२९ में देचेन पाल्मो और धोंडुप वांगमो की कार्यसूची में सरकारी बैठकों, कार्यक्रम से इतर होनेवाली बातचीत में भागीदारी और सरकारी कार्यालयों और विभिन्न देशों के मंडपों का दौरा शामिल है। अभियान में प्रतिनिधियों ने तिब्बत के कमजोर पारिस्थितिकीय तंत्र के बारे में जागरुकता बढ़ाने और तिब्बती पठार पर बढ़ती जलविद्युत परियोजनाओं के दुष्प्रभावों से तत्काल निपटने पर जोर दिया।
धोंडुप वांगमो ने कहा, ‘डेरगे बांध परियोजना सिर्फ स्थानीय मुद्दा नहीं है, बल्कि यह क्षेत्रीय जल सुरक्षा और जैव विविधता को प्रभावित करने वाले व्यापक पैटर्न का हिस्सा है। हम यहां स्थायी दृष्टिकोण के पक्ष में मत तैयार करने के लिए आए हैं जो तिब्बत के अद्वितीय पर्यावरण और उस पर निर्भर लोगों, दोनों का सम्मान करते हों।’
विभिन्न देशों के मंडपों और सरकारी कार्यालयों में आयोजित विभिन्न चर्चाओं में भाग लेकर तिब्बती प्रतिनिधिमंडल का उद्देश्य तिब्बत की नदियों और नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा करने वाली नीतियों के लिए अंतरराष्ट्रीय समर्थन को बढ़ावा देना है। डेरगे बांध को अपनी पक्षधरता अभियान के केंद्र में रखते हुए कॉप- २९ में प्रतिनिधियों की उपस्थिति एक महत्वपूर्ण जल स्रोत और जलवायु लचीलेपन के संघर्ष में अग्रिम पंक्ति क्षेत्र के रूप में तिब्बत की भूमिका को रेखांकित करती है।
इस आलेख और कॉप-२९ के साइड इवेंट्स और मंडपों में चर्चाओं के माध्यम से पाल्मो और वांगमो तिब्बत के पर्यावरण और इसके महत्वपूर्ण जल स्रोतों की सुरक्षा के लिए स्थायी विकल्पों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के पक्ष में माहौल तैयार कर रहे हैं।