टोक्यो। जापान में रहनेवाले तिब्बती लोग मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा दिवस मनाने के लिए ०८ दिसंबर को टोक्यो के असाकुसा हनकावाडो पार्क में अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ शामिल हुए। पीस मार्च फॉर ह्यूमन राइट्स कमेटी द्वारा ‘स्वतंत्रता और मानवाधिकारों के लिए तानाशाही से लड़ें (फाइट द डिक्टेटरशिप फॉर फीडम एंड ह्यूमन राइट्स)’ थीम पर आयोजित वार्ता कार्यक्रम और शांति मार्च का आयोजन किया गया था।
अपने-अपने देशों में मानवाधिकारों के हनन के कारण प्रताड़ना झेल रहे विभिन्न समुदायों के लोग इस कार्यक्रम में शामिल हुए और वहां अपनी कठिन परिस्थितियों के बारे में अनुभवों को व्यक्त किया। जापान में तिब्बती समुदाय और ‘स्टूडेंट्स फॉर फ्री तिब्बत’ ने तिब्बत की ओर से इस कार्यक्रम में भाग लिया और सीसीपी शासन के तहत तिब्बत में हो रहे मानवाधिकारों के उल्लंघन पर बात की। एसएफटी के कनाडा तारो ने कार्यक्रम का संचालन किया।
परम पावन दलाई लामा कार्यालय के संपर्क सचिव ताशी यांगज़ोम ने कार्यक्रम के लिए आयोजकों को धन्यवाद दिया और तिब्बत में चीनी अत्याचारों और निरंतर मानवाधिकारों के उल्लंघन के बारे में सभा को बताया। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय और जापानी सरकार से अपील की कि वे चीनी सरकार से मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा के सिद्धांतों को बनाए रखने और तिब्बत और अन्य चीनी कब्जे वाले क्षेत्रों में जनसंहार को रोकने का आग्रह करें।
दक्षिणी मंगोलिया, उग्यूर, चीन, हांगकांग, म्यांमार, कंबोडिया, यूक्रेन और ईरान के प्रतिनिधियों ने भी अपनी मातृभूमि में स्वतंत्रता और लोकतंत्र के लिए अपने संघर्षों के बारे में अनुभवों को लेकर सभा को संबोधित किया। उन्होंने दुनिया भर में तानाशाही के खिलाफ एकजुट होकर लड़ने और अपने-अपने देशों में मानवाधिकारों और स्वतंत्रता को बहाल करने के बारे में भी विचार व्यक्त किए।
जापान में तिब्बती समुदाय संगठन के अध्यक्ष दोरजी शिओटा ने सभी प्रतिभागियों को धन्यवाद दिया और बताया कि कैसे सीसीपी का क्रूर शासन तिब्बतियों को उनके धार्मिक अधिकारों और मानवाधिकारों से वंचित कर रहा है। उन्होंने प्रतिभागियों से एकजुट होने और दुनिया भर के तानाशाहों को सही संदेश भेजने के लिए स्वतंत्रता और लोकतंत्र के लिए एक साथ लड़ने का आग्रह किया ताकि उन्हें समझ में आए कि लोगों के लिए लोकतंत्र कितना अपरिहार्य है।
वार्ता कार्यक्रम के बाद बैनर, झंडे और तख्तियां लेकर विभिन्न समुदायों के लगभग दो सौ लोगों ने असाकुसा स्ट्रीट के आसपास शांति मार्च में निकाला। उन्होंने अपने मुद्दे को उठाने और अपने देशों में मानवाधिकारों की स्थिति का मूल्यांकन करने के लिए नारे लगाए। कई राहगीरों और पैदल चलने वालों ने एकजुटता और प्रशंसा का भाव दिखाया। शांति मार्च सुमिदा नदी के पास एक पार्क में शांतिपूर्वक समाप्त हुआ।