
धर्मशाला। तिब्बती कला प्रदर्शन संस्थान (टीपा) में ०५ नवंबर २०२४ को क्याब्जे कालोन त्रिसूर समदोंग रिनपोछे की ८५वीं जयंती मनाई गई। कार्यक्रम का आयोजन ल्हा चैरिटेबल ट्रस्ट ने किया था।
निर्वासित तिब्बती संसद की डिप्टी स्पीकर डोल्मा शेरिंग तेखांग ने मुख्य अतिथि के तौर पर, एलटीडब्ल्यूए के निदेशक गेशे लखदोर ने विशिष्ट अतिथि के तौर पर तथा पूर्व सांसद सोनम ग्यालत्सेन ने विशेष अतिथि के तौर पर कार्यक्रम में अपने विचार रखे। समारोह में रिनपोछे की तिब्बत के लिए आजीवन सेवा के प्रति गहरा आभार व्यक्त किया गया।
डिप्टी स्पीकर ने पूर्व कालोन त्रिपा क्याब्जे समदोंग रिनपोछे को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं दीं तथा उनके दीर्घायु होने की कामना की। उन्होंने दुनिया भर में तिब्बतियों द्वारा रिनपोछे के जन्मदिन के स्वैच्छिक समारोह की प्रशंसा की, जो तिब्बत के लिए उनके आजीवन समर्पण को दर्शाता है।
डिप्टी स्पीकर ने रिनपोछे के साथ अपनी पहली मुलाकात को भी याद किया जब तिब्बतियों के लिए बाल सभा (छात्रों की सभा) पहली बार डलहौजी स्थित केंद्रीय विद्यालय में शुरू की गई थी। यहां उन्होंने प्रिंसिपल के रूप में कार्य किया था। बाद में बाल सभा की स्थापना पचमारी स्कूल में की गई, जहां डिप्टी स्पीकर एक छात्र के रूप में उपस्थित थीं। उन्हें सभा में भाग लेने का अवसर मिला, जिसने समुदाय की सेवा करने के लिए उनकी प्रारंभिक प्रेरणा को प्रज्वलित किया और उन्हें निर्धारित पाठ्यक्रम से बाहर जाकर जिम्मेदारियां लेने का महत्व सिखाया।
क्याब्जे समदोंग रिनपोछे ने बाद में वाराणसी स्थित केंद्रीय उच्च तिब्बती अध्ययन संस्थान के प्रिंसिपल के रूप में कार्य किया, जहां संस्थान के कुछ शिक्षकों द्वारा उनके मार्गदर्शन में केंद्रीय तिब्बती प्रशासन में स्वैच्छिक योगदान को प्रोत्साहित करने के लिए सार्वजनिक आंदोलन की शुरुआत हुई। इस आंदोलन का गहरा प्रभाव पड़ा, जिसने दुनिया भर के तिब्बतियों को प्रभावित किया और तिब्बती लोगों के प्रामाणिक प्रतिनिधि के रूप में केंद्रीय तिब्बती प्रशासन की मान्यता को मजबूत कर दिया।
परम पावन दलाई लामा द्वारा तिब्बती लोगों को लोकतंत्र के उपहार और तिब्बती आंदोलन को अहिंसक दृष्टिकोण की ओर ले जाने में उनके मार्गदर्शन के बारे में चर्चा करते हुए डिप्टी स्पीकर ने तिब्बती लोकतंत्र के जमीनी स्तर पर कामकाज में क्याब्जे समदोंग रिनपोछे के अमूल्य योगदान पर जोर दिया।
इसकी शुरुआत १९९० में चार्टर मसौदा समिति (ड्राफ्टिंग कमेटी) के सदस्य के रूप में उनकी भूमिका से हुई, जहां उन्होंने आधारभूत दस्तावेज को आकार देने में मदद की। रिनपोछे ने दस साल तक निर्वासित तिब्बती संसद के अध्यक्ष के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान केंद्रीय तिब्बती प्रशासन (सीटीए) को अन्य लोकतांत्रिक प्रणालियों के बराबर एक नियम-आधारित सरकार की ओर ले जाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
तिब्बती लोकतंत्र के विकास में ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित हुए क्याब्जे समदोंग रिनपोछे २००१ में भारी बहुमत से पहले कालोन ट्रिपा चुने गए। उनका नेतृत्व सत्य, अहिंसा और एक वास्तविक लोकतांत्रिक व्यवस्था के प्रति गहन प्रतिबद्धता द्वारा निर्देशित था।
डिप्टी स्पीकर ने रिनपोछे के मध्यम मार्ग दृष्टिकोण (एमडब्ल्यूए) में गहरी अंतर्दृष्टि पर प्रकाश डाला। मध्यम मार्ग दृष्टिकोण केंद्रीय तिब्बती प्रशासन का आधिकारिक रुख है, जिसे परम पावन दलाई लामा ने पेश किया और निर्वासित तिब्बती संसद ने सर्वसम्मति से इसे अंगीकार किया है। रिनपोछे के नेतृत्व के प्रमुख पहलुओं के रूप में उनकी बुद्धिवादी सोच के साथ ही आलोचना से निपटने के लिए उनके व्यावहारिक और दयालु दृष्टिकोण पर बल दिया गया।
डिप्टी स्पीकर ने रिनपोछे के अमूल्य योगदान पर प्रकाश डाला, जिसमें केंद्रीय तिब्बती प्रशासन के कार्यालयों के पंजीकरण में उनकी भूमिका और तिब्बती शिक्षा नीति पर उनके प्रभाव सहित कई अन्य कार्य शामिल हैं।
अंत में डिप्टी स्पीकर ने उपस्थित लोगों को तिब्बती मुद्दे के प्रति उनके आजीवन समर्पण के लिए श्रद्धांजलि के रूप में अपने दैनिक जीवन में दया और अहिंसा पर रिनपोछे की शिक्षाओं को शामिल करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने सभी से तिब्बत के सामान्य उद्देश्य में व्यक्तिगत रूप से योगदान देने का भी आग्रह किया।
कार्यक्रम में विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों की बातचीत का कार्यक्रम भी शामिल किया गया था।