
बर्लिन। बर्लिन यात्रा के अंतिम दिन तिब्बती सांसदों- यूडन औकात्सांग और शेरिंग ल्हामो ने जर्मन बुंडेस्टाग के पॉल-लोबे-हॉस के समिति कक्ष में तिब्बत पर एक प्रस्तुति दी। इस कार्यक्रम का आयोजन जर्मन-तिब्बतन पालिर्यामेंटरी ग्रुप फॉर तिब्बत (तिब्बत के लिए जर्मन तिब्बती संसदीय समूह)’ के अध्यक्ष सांसद माइकल ब्रांड ने किया था।
बैठक में सीडीयू पार्टी के सांसद माइकल ब्रांड और चीन पर अंतरसंसदीय गठबंधन के सह-अध्यक्ष, मानवाधिकार और मानवीय सहायता पर एफडीपी पार्टी के प्रवक्ता सांसद पीटर हेइड्ट, स्वास्थ्य नीति पर ग्रीन पार्टी के प्रवक्ता सांसद मारिया क्लेन-श्मींक और विदेश नीति पर एफडीपी कार्य समूह के सदस्य सांसद फ्रैंक मुलर मौजूद रहे।
जेनेवा स्थित तिब्बत कार्यालय में संयुक्त राष्ट्र में एडवोकेसी अधिकारी फुंटसोक टॉपग्याल और जर्मनी में तिब्बती समुदाय के अध्यक्ष डंडुप डोनका के अलावा आईसीटी जर्मनी के निदेशक काई मुलर और ‘तिब्बतन इनिशिएटिव ड्यूशलैंड’ के डेविड मिसल जर्मन बुंडेस्टैग में इस प्रस्तुति कार्यक्रम में हमारे साथ शामिल हुए।
दोनों तिब्बती सांसदों ने तिब्बत की वर्तमान स्थिति पर संक्षिप्त प्रस्तुति दी। इसमें तिब्बती पहचान, संस्कृति और धर्म को मिटाने के उद्देश्य से चीन की संहारक नीतियों पर ध्यान केंद्रित किया गया। इस दौरान सरकार नियंत्रित आवासीय स्कूलों को चलाने, तिब्बती निजी स्कूलों और मठों के स्कूलों को बंद करने और विकास के नाम पर मठों को ध्वस्त करने पर विशेष चिंता व्यक्त की गई।
इस कार्यक्रम में जर्मन सांसदों से विशेष अपील की गई कि वे जर्मन संसद में, विशेष रूप से परम पावन दलाई लामा की ९०वीं जयंती के अवसर पर एक घोषणा पारित करें, जिसमें परम पावन दलाई लामा को ही उनके अपने पुनर्जन्म को निर्धारित करने के अधिकार का समर्थन किया गया हो। तिब्बती सांसदों ने दोहराया कि इससे चीनी सरकार को तिब्बती लोगों के धार्मिक क्षेत्र में हस्तक्षेप न करने का एक मजबूत संकेत मिलेगा।
जर्मन सांसदों से तिब्बत के प्रति अपनी एकजुटता दिखाने के लिए धर्मशाला आने का आग्रह करने पर सांसदों में से एक ने २०२५ की शुरुआत में धर्मशाला आने की अपनी इच्छा व्यक्त की। प्रस्तुति के बाद तिब्बती सांसदों को सांसद माइकल ब्रैंड और उनके कर्मचारियों के सौजन्य से जर्मन संसद के एक घंटे के दौरे पर ले जाया गया। उसी शाम तिब्बती सांसद प्राग के लिए रवाना हो गए।







