
तिब्बत के न्गाबा काउंटी स्थित कीर्ति मठ के दो भिक्षु- लोबसंग समतेन और लोबसंग त्रिनले (या त्रिनपो) के अलावा न्गाबा काउंटी से शेरिंग ताशी और वांगकी नामक दो नागरिकों को भी चीनी अधिकारियों द्वारा गुप्त रूप से गिरफ़्तार कर लिया गया है। यह काउंटी पारंपरिक रूप से अमदो प्रांत का हिस्सा है। उनके गुप्त रूप से हिरासत में लिए जाने के बाद से उनके ठिकाने और उनकी सेहत के बारे में कोई जानकारी नहीं है।
हाल ही में हिरासत में लिए गए लोगों में ५३ वर्षीय लोबसंग समतेन शामिल हैं, जो गोलोग के चिगड्रिल काउंटी में खांगसर (चीनी: कांगसाई) के एक वरिष्ठ भिक्षु हैं। समतेन कीर्ति मठ में जूनियर मंत्र गुरु के रूप में कार्य करते हैं और करम्पा (गेशे) की उपाधि प्राप्त हैं। तिब्बती मीडिया सूत्रों के अनुसार, २०११ में न्गाबा मठ से सामूहिक गिरफ्तारी के समय हिरासत में लिए गए ३०० भिक्षुओं में लोबसंग समतेन भी शामिल थे। न्गाबा काउंटी के रोंग खारसा (चीनी: कुआशा) से ४० वर्षीय लोबसंग त्रिनले (जिसे त्रिनपो के नाम से भी जाना जाता है) को भी हिरासत में लिया गया है, जो कि कीर्ति मठ में तीसरे वर्ष के विनय के छात्र है और अनुष्ठान समारोहों का आयोजन करते हैं। नागरिक बंदियों में वर्तमान में न्गाबा काउंटी में रह रही चार बच्चों की मां ४३ वर्षीय वांगकी और उनके भाई ४१ वर्षीय शेरिंग ताशी हैं। दोनों ही कलको और जिग्जे त्सो के बच्चे हैं, जो रोंग खारसा के हरित्संग परिवार से हैं। सूत्रों से पता चलता है कि भारत में रहने वाले तिब्बतियों के साथ कथित संबंध रखने के कारण हरित्संग परिवार के कई सदस्यों को हिरासत में लिया गया है। सभी बंदियों का वर्तमान ठिकाना अज्ञात है।
अनेक रिपोर्ट में न्गाबा क्षेत्र में निगरानी और प्रतिबंधों को बढ़ाने का संकेत दिया गया है, जिसमें कीर्ति मठ और आसपास के क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया गया है। इस बीच अघोषित हिरासत का एक पैटर्न सामने आया है, जिसमें रिहा किए गए बंदियों को उनकी गिरफ्तारी, आरोपों या हिरासत के स्थानों के बारे में कोई भी जानकारी देने से प्रतिबंधित किया गया है। इस कृत्य से तिब्बतियों के खिलाफ चीनी अधिकारियों के प्रवर्तन और गैरकानूनी कार्रवाइयों के बारे में सार्वजनिक तौर पर जानकारी उजागर किए जाने को गंभीर रूप से प्रतिबंधित करता है।
चीनी अधिकारियों ने न्गाबा क्षेत्र में १८ वर्ष से कम आयु के सभी भिक्षुओं को मठ छोड़ने और चीनी सरकार द्वारा संचालित आवासीय स्कूलों में जाने का आदेश दिया है। कीर्ति मठ का प्रारंभिक अध्ययन संस्थान, जहां पहले १४०० से अधिक तिब्बती छात्र और शिक्षक अध्ययन- अध्यापन करते थे। वहां अब केवल १८ वर्ष या उससे अधिक आयु के लगभग १०० छात्र ही बचे है। इसके अलावे वहां के अन्य मठ संस्थानों को बंद कर दिया गया है।
इसके अलावा, न्गाबा काउंटी और न्गाबा प्रिफेक्चर में नई शिक्षा नीतियों के अनुसार आवासीय विद्यालयों में भाषा कक्षाओं को छोड़कर सभी विषयों को विशेष रूप से चीनी भाषा के माध्यम से पढ़ाया जाना आवश्यक कर दिया गया है। ये उपाय तिब्बती भाषा, धार्मिक रिवाजों और सांस्कृतिक पहचान को युवा पीढ़ी तक पहुंचाने से रोकने के लिए प्रशासनिक और बलपूर्वक दोनों तरीकों का उपयोग करने वाली व्यापक नीति का हिस्सा हैं।
चीनी अधिकारियों को तुरंत इन मनमाने ढंग से हिरासत में लिए जाने को समाप्त करना चाहिए और उन चार तिब्बतियों के ठिकाने के बारे में सटीक जानकारी प्रदान करनी चाहिए जो वर्तमान में लापता हैं। केंद्रीय तिब्बती प्रशासन ने पिछले सितंबर में अधिकारियों द्वारा न्गाबा के कीर्ति मठ और ज़ोगे काउंटी के दो मठों से १७०० से अधिक युवा भिक्षुओं को जबरन हटाने और बच्चों या उनके माता-पिता की सहमति के बिना चीनी सरकार द्वारा संचालित आवासीय स्कूलों में उनका जबरन दाखिला कराने की रिपोर्टों पर गंभीर चिंता जताई थी।



