धर्मशाला। पोप फ्रांसिस की गरिमामयी उपस्थिति में इटली स्थित अंतरधार्मिक वार्ता के लिए पोंटिफिकल काउंसिल के सहयोग से श्री नारायण गुरुकुलम ट्रस्ट द्वारा आयोजित विश्व अंतरधार्मिक सम्मेलन २९ और ३० नवंबर २०२४ को वेटिकन में आयोजित किया गया।
तिब्बती बौद्धों के प्रतिनिधि के रूप में क्याब्जे कुंदेलिंग तसक रिनपोछे ने दुनिया के प्रमुख धार्मिक समूहों, सार्वजनिक हस्तियों और विद्वानों के अलावा श्रद्धेय आध्यात्मिक नेताओं और पुजारियों के साथ सम्मेलन में भाग लिया।
बैठक के दौरान कैथोलिक चर्च के प्रमुख और वेटिकन सिटी स्टेट के संप्रभु पोप फ्रांसिस ने इस आयोजन के लिए आयोजकों की सराहना की और कहा, ‘धर्मों की महान शिक्षाओं के प्रति सम्मान की कमी दुनिया की आज की अशांत स्थिति का एक कारण है।’ पोप ने आगे जोर दिया कि विभिन्न धार्मिक परंपराओं के बीच सामंजस्यपूर्ण सहयोग के माध्यम से दुनिया में सकारात्मक योगदान देने के लिए अच्छे नैतिक उपदेशों का अभ्यास किया जाना चाहिए।
अपने संबोधन में क्याब्जे कुंदेलिंग तसक रिनपोछे ने परम पावन १४वें दलाई लामा की महान प्रतिबद्धताओं का परिचय दिया और विश्व अंतरधार्मिक सम्मेलन के दौरान धार्मिक सद्भाव को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया। रिनपोछे ने आगे कहा कि वर्तमान में दुनिया को प्रभावित करने वाले कई दुखों को दूर करने के लिए विभिन्न धर्मों की आध्यात्मिक शक्ति का उपयोग करना, गहन और सार्थक अंतरधार्मिक सहयोग के माध्यम से विश्व शांति की दिशा में मिलकर काम करना, युवाओं की नई पीढ़ी को नैतिक मार्गदर्शन प्रदान करना और उन्हें सकारात्मक योगदान देने और सभी के लिए अधिक दयालु और सामंजस्यपूर्ण भविष्य बनाने के लिए सशक्त बनाना अति आवश्यक है।
इसके अलावा पोप के साथ बैठकों के दौरान कुंदेलिंग रिनपोछे ने परम पावन दलाई लामा द्वारा लिखित एक पुस्तक उन्हें स्मृति चिन्ह के रूप में भेंट किया। आयोजन समिति ने कुंदेलिंग रिनपोछे को इंग्लैंड में २०२५ में होने वाले धार्मिक सम्मेलन में भाग लेने के लिए निमंत्रण भी दिया।