
प्रयागराज, ०४ फरवरी २०२५। केंद्रीय तिब्बती प्रशासन (सीटीए) की माननीया कलोन (मंत्री) डोल्मा ग्यारी, सीटीए के धर्म और संस्कृति विभाग के अवर सचिव शेरिंग तोपग्याल और सुरक्षा विभाग से चिमे ताशी ने इस सप्ताह प्रयागराज में ‘बुद्ध विशेष संगम महाकुंभ’ और ‘बोध महाकुंभ यात्रा’ में भाग लिया।
आयोजन के पहले दिन सुरक्षा कलोन ने ‘बोध महाकुंभ यात्रा’ कार्यक्रम को सुविधाजनक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह एक आध्यात्मिक समागम था जिसमें सैकड़ों तीर्थयात्री और भक्त सम्मिलित रूप से बौद्ध मूल्यों का जश्न मनाने के लिए एक साथ आए थे। शाम को कलोन ने केंद्रीय उच्च तिब्बती अध्ययन संस्थान, वाराणसी के प्रतिभागियों और सिक्किम के भिक्षुओं के साथ बातचीत की।
दूसरे दिन ०५ फरवरी २०२५ को माननीया कलोन ने हिमालयन बौद्ध सांस्कृतिक संघ द्वारा आयोजित एक अनूठे कार्यक्रम ‘‘बुद्ध विशेष संगम महाकुंभ’’ में भाग लिया। कार्यक्रम में तिब्बती सांस्कृतिक परंपरा के महत्वपूर्ण अंग लखर का उत्सव मनाया गया, जिसके साथ संगसोल प्रार्थना और सांस्कृतिक प्रदर्शन (ताशी शोपा) भी हुए, जिसमें तिब्बती बौद्ध धर्म की समृद्ध परंपराओं पर प्रकाश डाला गया।
यह आध्यात्मिक समागम तिब्बती बौद्ध धर्म और भारतीय धार्मिक रिवाजों के बीच बढ़ते सांस्कृतिक आदान-प्रदान को रेखांकित करता है। यह संवाद के लिए एक मंच प्रदान करता है और विभिन्न समुदायों के बीच संबंधों को मजबूत करता है।
माननीया कालोन ने भारत-तिब्बत समन्वय कार्यालय (आईटीसीओ) बुक स्टॉल का भी निरीक्षण किया और स्वयंसेवकों और आगंतुकों से बातचीत की।
दोपहर का कार्यक्रम ‘बोध महाकुंभ यात्रा’ और ‘बुद्ध विशेष संगम महाकुंभ’ की समिति द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित शोभा यात्रा के रूप में हुआ। बौद्ध भिक्षुओं ने ‘बुद्धं शरणम् गच्छामि’, ‘धम्मम् शरणम् गच्छामि’, ‘संघम् शरणम् गच्छामि’ का नारा लगाते हुए भव्य जुलूस निकाला, जिसका उद्देश्य जन-जन तक बौद्ध धर्म के सार को पहुंचाना था। जुलूस का समापन जूना अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि के प्रभु प्रेमी शिविर में हुआ, जहां भिक्षुओं का गर्मजोशी से स्वागत किया गया।
माननीया कालोन डोल्मा ग्यारी ने इस आयोजन को ऐतिहासिक बताया और कहा कि यह सनातन धर्म और बौद्ध धर्म के बीच निकटता को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने भिक्षुओं और लामाओं को साथ-साथ चलते हुए देखकर अपनी खुशी व्यक्त की और कहा कि बौद्ध और सनातन हमेशा एकजुट रहे हैं और आगे भी एक साथ आगे बढ़ते रहेंगे।
प्रयागराज में महाकुंभ को दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक आयोजन के रूप में मान्यता प्राप्त है, जिसमें दुनिया भर से लाखों श्रद्धालु और तीर्थयात्री आते हैं। यह पवित्र आयोजन हर १२ साल के बाद होता है। यह आयोजन विभिन्न धर्मों के लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण तीर्थयात्रा है। यह असाधारण अवसर गंगा, यमुना और सरस्वती नदियों के त्रिवेणी संगम पर आध्यात्मिक नवीकरण और चिंतन का एक अनूठा अवसर प्रदान करता है।