
तेज़ू, अरुणाचल प्रदेश। केंद्रीय तिब्बती प्रशासन के सिक्योंग पेन्पा शेरिंग अरुणाचल प्रदेश, नगालैंड और पश्चिम बंगाल में स्थित तिब्बती बस्तियों की अपनी आधिकारिक यात्राओं के दूसरे चरण में २७ जनवरी २०२५ को तेजू धारग्येलिंग बस्ती पहुंचे। दिन भर की यात्रा के दौरान उन्होंने बस्ती में १६वें कशाग की परियोजनाओं के निरीक्षण सहित कई कार्यक्रमों में शिरकत की।
सिक्योंग के आगमन पर धारग्येलिंग बस्ती अधिकारी कुंगा जिग्मे और स्थानीय निवासियों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। उनकी यात्रा की शुरुआत रिनपोछे के निवास पर क्यबजे ज़ोग्चेन गनोर रिनपोछे को श्रद्धांजलि देने के साथ हुई। सिक्योंग ने स्थानीय अधिकारियों और गणमान्य व्यक्तियों के साथ संक्षिप्त बैठकें भी कीं। इस दौरान उन्होंने क्षेत्र में रहनेवाले तिब्बतियों को दिए जा रहे निरंतर समर्थन के लिए तिब्बती समुदाय की ओर से हार्दिक आभार व्यक्त किया।
तिब्बतियों के कल्याण का आकलन करने के लिए सिक्योंग ने बस्ती के भीतर सभी शिविरों का दौरा किया, जिसमें एक नए शिविर के लिए नया स्थल भी शामिल था। इसमें तूतिंग के कई तिब्बती परिवार रहेंगे।
बाद में सिक्योंग ने एक सार्वजनिक सभा को संबोधित किया, जिसमें उन्होंने तिब्बती पठार के भू-राजनीतिक और सामरिक महत्व पर जोर दिया। उन्होंने ब्रह्मपुत्र नदी पर पीआरसी की प्रस्तावित मेगा-बांध परियोजना के बारे में भी संक्षेप में चर्चा की। इस परियोजना से तटवर्ती देशों के निवासियों के लिए गंभीर पारिस्थितिकीय और सामरिक दुष्परिणाम उपस्थित होने की आशंका है। क्षेत्र की भूकंपीय संवेदनशीलता पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने चेतावनी दी कि इस तरह के बड़े पैमाने पर बांध निर्माण से जोखिम और बढ़ जाएगा। सिक्योंग ने कहा, ‘तिब्बत के डिंगरी क्षेत्र में हाल ही में आया विनाशकारी भूकंप प्राकृतिक आपदाओं की एक कड़ी की याद दिलाता है जो इसके बाद आ सकती हैं।’
इस क्षेत्रीय चिंता से इतर सिक्योंग ने १६वें कशाग के तहत पूर्ण हो चुके और चल रहे दोनों तरह के कार्यों की अद्यतन जानकारी प्रदान की। साथ ही परम पावन दलाई लामा के दूरदर्शी नेतृत्व को भी स्वीकार किया। उन्होंने तिब्बतियों की पुरानी पीढ़ियों के लिए भी गहरी प्रशंसा व्यक्त की, जिनके प्रयासों ने संपन्न तिब्बती निर्वासित समुदाय की स्थापना में मदद मिली। इस संपन्न तिब्बती समुदाय ने एक मजबूत लोकतांत्रिक प्रणाली का निर्माण किया है और मध्यम मार्ग नीति के माध्यम से तिब्बती स्वतंत्रता की बहाली की वकालत करना जारी रखा है।
सिक्योंग ने इस अवसर पर भारत सरकार और यहां के लोगों, विशेष रूप से अरुणाचल प्रदेश के नेतृत्व को उनके अटूट समर्थन के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने तिब्बती निवासियों से स्थानीय आबादी के साथ सौहार्दपूर्ण संबंधों को बनाए रखने और स्थानीय कानूनों का पालन करने का आग्रह किया।
इसके बाद सिक्योंग पश्चिम बंगाल में तिब्बती बस्तियों के दौरे पर निकल गए। अरुणाचल प्रदेश की उनकी यात्रा को एक महत्वपूर्ण सफलता माना जाता है, जिसे ईटानगर में ‘पर्यावरण और सुरक्षा’ विषयक सेमिनार के सफल आयोजन में देखा जा सकता है।